पेयजल और स्वच्छता विभाग ने PM-JANMAN और Dharti Aaba Janjatiya Gram Utkarsh Abhiyan (DA-JGUA) के तहत आदिवासी क्षेत्रों में पेयजल कवरेज तेज करने के लिए समीक्षा बैठक की। तत्काल प्रशासनिक काम उन बस्तियों की पहचान करना है जो सत्यापित कवरेज सूची से बाहर रह गई हैं।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से PM-JANMAN, DA-JGUA, SurveySetu और Jal Jeevan Mission के सूचना तंत्र के रिकॉर्ड का मिलान करने को कहा गया। जिला प्रशासन को भी निष्कर्षों का सत्यापन करना है, जिसके बाद प्रस्ताव आगे भेजे जाएंगे। कई राज्यों ने अक्टूबर में प्रस्ताव देने की समयसीमा बताई।
“Saturation” कार्यक्रमों में अलग-अलग डेटाबेस, गांव पहचान संख्या और कवरेज की परिभाषाएं एक जैसी न हों तो पात्र परिवार छूट सकते हैं। इसलिए डेटा मिलान केवल आईटी का काम नहीं, बल्कि यह तय करता है कि कौन गिना जाएगा, किसे वित्त मिलेगा और सेवा कहां पहुंचेगी।
UPSC के लिए यह last-mile governance, आदिवासी कल्याण और विभागीय convergence का उदाहरण है। समीक्षा ने सत्यापन और प्रस्ताव की प्रक्रिया तय की है; इससे यह साबित नहीं होता कि सभी पात्र आदिवासी बस्तियों में विश्वसनीय कार्यशील नल-जल सेवा पहुंच चुकी है।