सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने बताया कि Protection of Civil Rights Act, 1955 और Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के क्रियान्वयन के लिए तीन वित्त वर्षों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹1,423.30 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी की गई।
यह सहायता प्रवर्तन तंत्र, विशेष अदालतों, पीड़ितों को राहत और पुनर्वास, कानूनी सुरक्षा की जानकारी तथा शिकायत निवारण को मजबूत करने के लिए है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों कानूनों का प्राथमिक क्रियान्वयन राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों की जिम्मेदारी है।
यह केंद्र-राज्य प्रशासन के संबंध का अच्छा उदाहरण है। कानून संसद स्तर पर बन सकता है, लेकिन परिणाम FIR दर्ज होने, जांच की गुणवत्ता, अभियोजन क्षमता, अदालतों की कार्यप्रणाली, समय पर राहत और प्रशासनिक निगरानी पर निर्भर करते हैं।
UPSC के लिए कानूनी प्रावधान और implementation capacity का अंतर महत्वपूर्ण है। घोषित राशि प्रवर्तन व्यवस्था के लिए सरकारी सहायता को दिखाती है; इससे अपने-आप यह साबित नहीं होता कि अत्याचार घटे हैं या हर पीड़ित को समय पर न्याय मिला है।
