G20 व्यापार मंत्रियों की मिलवॉकी बैठक के समापन दिन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने structural excess capacity, Most-Favoured-Nation (MFN) principle, supply chains में forced labour और व्यापक trade distortions पर भारत की स्थिति रखी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत ने कहा कि corrective trade measures पारदर्शी, evidence-based और WTO नियमों के अनुरूप होने चाहिए। यह विवादित क्षेत्र है: अलग-अलग देश subsidy, excess capacity और coercive trade practice की परिभाषा तथा unilateral tariffs की उपयोगिता पर सहमत नहीं हैं।
WTO का MFN सिद्धांत सामान्यतः यह अपेक्षा करता है कि एक सदस्य को दिया गया व्यापार लाभ अन्य सदस्यों तक भी पहुंचे, हालांकि इसके अपवाद मौजूद हैं। इसलिए MFN reform की बहस multilateral system की predictability और non-discrimination से जुड़ती है।
UPSC के लिए यह विकास दिखाता है कि भारत multilateral rules को बचाने और developing-country policy space बनाए रखने की कोशिश एक साथ करता है। यह भारत की negotiating position है; इसे G20 का अंतिम कानूनी समझौता नहीं माना जाना चाहिए।